
अंजरेल की पहाड़ियों में तेंदुएं का दीदार :- कैमरे में कैद हुआ खूंखार शिकारी
लौह अयस्क खनन क्षेत्र में कर्मचारी ने देखा, लाल मिट्टी और पथरीले रास्ते पर विचरण करता नजर आया वन्यजीव; सोशल मीडिया पर तस्वीर चर्चा में
नारायणपुर। जिले के अंजरेल क्षेत्र में लौह अयस्क खनन गतिविधियों के बीच तेंदुए की मौजूदगी सामने आई है। अंजरेल की पहाड़ी स्थित खनन क्षेत्र में काम कर रहे एक कर्मचारी ने तेंदुए को विचरण करते देखा और सुरक्षित दूरी से उसकी तस्वीर मोबाइल कैमरे में कैद कर ली। तेंदुए की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा हो रही है।
तस्वीरों में तेंदुआ अंजरेल की लाल-भूरी पथरीली जमीन के बीच दिखाई दे रहा है। पहली तस्वीर में वह खनन क्षेत्र के रास्ते पर खड़ा होकर आसपास नजर दौड़ाता दिखाई देता है, जबकि दूसरी तस्वीर में वह धीरे-धीरे आगे बढ़ता नजर आ रहा है। दोनों तस्वीरों में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय दिखाई दे रहा है।
खनन क्षेत्र में वन्यजीव की मौजूदगी ने खींचा ध्यान
अंजरेल क्षेत्र रावघाट लौह अयस्क परियोजना के डिपॉजिट-एफ का हिस्सा है। केंद्र सरकार के पर्यावरणीय दस्तावेजों के अनुसार डिपॉजिट-एफ में रावडोंगरी, ब्लॉक-ए, तारहुर, अंजरेल, कोरगांव, खरकागांव और टाकरेल सहित सात ब्लॉक शामिल हैं। अंजरेल को परियोजना के प्रथम चरण में विकसित किए जाने वाले ब्लॉकों में भी शामिल किया गया था।
पर्यावरण मंत्रालय के दस्तावेजों में रावघाट डिपॉजिट-एफ को नारायणपुर और कांकेर जिलों के वन क्षेत्र से संबंधित परियोजना के रूप में दर्ज किया गया है। ऐसे क्षेत्र में खनन गतिविधियों के बीच किसी बड़े मांसाहारी वन्यजीव का दिखाई देना वन क्षेत्र में उसकी आवाजाही की ओर ध्यान आकर्षित करता है
लाल मिट्टी के बीच शानदार छलावरण
तस्वीरों में तेंदुए का पीला-भूरा शरीर और काले धब्बे अंजरेल की लाल मिट्टी के साथ मिलते हुए दिखाई दे रहे हैं। यही प्राकृतिक रंग-रूप तेंदुए को आसपास के वातावरण में छिपने में मदद करता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार तेंदुआ बेहद अनुकूलनशील बड़े मांसाहारी वन्यजीवों में शामिल है। यह अलग-अलग प्रकार के आवासों में रह सकता है और बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपने व्यवहार में बदलाव कर सकता है। वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट में भारतीय तेंदुए को Panthera pardus fusca के रूप में दर्ज किया गया है।
तेंदुए की इसी अनुकूलन क्षमता के कारण वह जंगलों के साथ-साथ मानव गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों के आसपास भी दिखाई दे सकता है। इसके भोजन में छोटे-बड़े विभिन्न वन्यजीव शामिल होते हैं और उपलब्ध शिकार के अनुसार इसकी भोजन संबंधी आदतें बदल सकती हैं।
संरक्षित वन्यजीव, नहीं किया जा सकता शिकार
भारतीय तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल है। यानी इसे कानून के तहत उच्चतम स्तर का संरक्षण प्राप्त है। वन्यजीव संस्थान की ‘स्टेटस ऑफ लेपर्ट्स इन इंडिया-2022’ रिपोर्ट में भी भारतीय तेंदुए को अनुसूची-1 में दर्ज किया गया है।
ऐसे में तेंदुआ दिखाई देने पर उसे घेरने, पीछा करने या नजदीक जाकर तस्वीर लेने की कोशिश खतरनाक होने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से भी उचित नहीं है।
माइनिंग क्षेत्र में सतर्कता जरूरी
अंजरेल जैसे खनन क्षेत्र में भारी मशीनरी, वाहनों और श्रमिकों की नियमित आवाजाही होती है। ऐसे में वन्यजीव की आवाजाही सामने आने के बाद खनन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। तेंदुआ दिखाई देने पर उसकी गतिविधि में हस्तक्षेप करने के बजाय वन विभाग को सूचना देना अधिक सुरक्षित कदम होगा।
वन्यजीव संस्थान की रिपोर्टों में भी तेंदुए की अनुकूलन क्षमता के साथ मानव-तेंदुआ संघर्ष की संभावना को संरक्षण की महत्वपूर्ण चुनौती माना गया है।
तस्वीर बनी चर्चा का विषय
अंजरेल की पहाड़ी में तेंदुए के विचरण की तस्वीर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। तस्वीर में तेंदुए का प्राकृतिक परिवेश में दिखाई देना निश्चित रूप से रोमांच पैदा करने वाला है, लेकिन विशेषज्ञ दृष्टि से ऐसी घटनाओं में वन्यजीव से सुरक्षित दूरी बनाए रखना और उसकी गतिविधि में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करना सबसे महत्वपूर्ण है।
🟦 प्रधान संपादक – डे नारायण सिंह बघेल













