अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में पहली बार गूंजी देशभक्ति की गूंज  :- 44वीं वाहिनी आईटीबीपी ने निकाली तिरंगा यात्रा

🟥 रिपोर्टर – डे नारायण सिंह बघेल

🟪 जिला – नारायणपुर

अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में पहली बार गूंजी देशभक्ति की गूंज  :- 44वीं वाहिनी आईटीबीपी ने निकाली तिरंगा यात्रा

अबूझमाड़, छत्तीसगढ़। देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के सम्मान का संदेश लेकर 44वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत अबूझमाड़ के दुर्गम एवं संवेदनशील क्षेत्र के गांव धोबे, डोडीमरका, पदमेटा एवं लंका में ध्वजारोहण एवं तिरंगा यात्रा का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में हिमवीरों के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
पहली बार निकली तिरंगा यात्रा

अबूझमाड़ के इन दुर्गम क्षेत्रों में इतिहास में पहली बार ध्वजारोहण के साथ तिरंगा यात्रा निकाली गई। तिरंगा हाथों में लेकर ग्रामीणों और हिमवीरों ने पूरे उत्साह के साथ यात्रा में हिस्सा लिया। इस दौरान देशभक्ति के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
यह आयोजन स्थानीय ग्रामीणों में राष्ट्र के प्रति गौरव, एकता और अपनत्व की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
ग्रामीणों को बताया तिरंगे का महत्व
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को राष्ट्रीय ध्वज के गौरव, स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों और स्वतंत्रता दिवस के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। ग्रामीणों को बताया गया कि तिरंगा केवल देश का ध्वज नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, संप्रभुता, एकता, अखंडता और वीर जवानों के त्याग एवं बलिदान का प्रतीक है।
इस अवसर पर ग्रामीणों एवं हिमवीरों ने सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया, जिससे पूरे क्षेत्र में राष्ट्रभक्ति का माहौल और अधिक मजबूत हो गया।
सुरक्षा बल और ग्रामीणों के बीच बढ़ा विश्वास
कार्यक्रम के दौरान आईटीबीपी के अधिकारियों एवं हिमवीरों ने ग्रामीणों के साथ संवाद भी किया। इस दौरान क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास एवं जनकल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
आईटीबीपी द्वारा आयोजित इस पहल का उद्देश्य सुरक्षा बल और स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास, सहयोग एवं आत्मीय संबंधों को और मजबूत करना भी रहा।
जनसहभागिता से राष्ट्र निर्माण की ओर कदम
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में आईटीबीपी द्वारा समय-समय पर जनसहभागिता एवं राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। इन प्रयासों से स्थानीय लोगों का राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ाव बढ़ाने तथा सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास एवं सहयोग की भावना मजबूत करने में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
44वीं वाहिनी आईटीबीपी ने कहा कि जनसेवा, राष्ट्रहित और स्थानीय समुदाय के सहयोग के लिए बल सदैव अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर जारी रखा जाएगा।
अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में पहली बार निकली तिरंगा यात्रा ने न केवल ग्रामीणों के बीच देशभक्ति की भावना को मजबूत किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि तिरंगे की शान और राष्ट्रभक्ति की भावना देश के हर कोने तक पहुंच रही

🟦 प्रधान संपादक – डे नारायण सिंह बघेल

 

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