लाल आतंक के अंधेरे से तिरंगे की रोशनी तक —कुतुल की बदली तस्वीर :- 41वीं वाहिनी आईटीबीपी ने मनाया 80वां स्वतंत्रता दिवस

🟥 रिपोर्टर – डे नारायण सिंह बघेल

🟦 जिला – नारायणपुर

काले झंडे के साये से तिरंगे की शान तक—कुतुल में 41वीं वाहिनी आईटीबीपी ने मनाया 80वां स्वतंत्रता दिवस

कुतुल, नारायणपुर

15 अगस्त 2026 कभी नक्सल गतिविधियों के लिए कुख्यात रहा अबूझमाड़ का कुतुल आज बदलाव और राष्ट्रभक्ति की नई तस्वीर पेश कर रहा है। जिस धरती पर कभी नक्सलियों का काला झंडा अपनी दहशत का प्रतीक बनकर लहराया करता था, उसी कुतुल की धरती पर आज पूरे गौरव और सम्मान के साथ तिरंगा शान से लहराया। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 41वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) के कंपनी ऑपरेटिंग बेस द्वारा आयोजित समारोह ने इस बदलाव को जीवंत रूप में सामने रखा।
समारोह का शुभारंभ राष्ट्रध्वज फहराने, राष्ट्रगान और देशभक्ति गीतों के साथ हुआ। तिरंगे के सम्मान में उपस्थित जवानों, ग्रामीणों, बच्चों एवं विद्यार्थियों ने राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
कार्यक्रम में 41वीं वाहिनी के सेनानी श्री बेनुधर नायक एवं सहायक सेनानी श्री अर्जुन सामल उपस्थित रहे। सेनानी महोदय ने विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को स्वतंत्रता दिवस के महत्व तथा देश की आजादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए त्याग, संघर्ष और बलिदान की जानकारी दी। उन्होंने नई पीढ़ी को देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रभक्ति के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
समारोह में रामकृष्ण मिशन विवेकानंद विद्या मंदिर के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकगण, परपा एवं कुतुल आंगनबाड़ी के बच्चे एवं कार्यकर्ता, स्थानीय ग्रामीण तथा कुतुल में तैनात छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारी शामिल हुए। विद्यार्थियों एवं युवक-युवतियों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समारोह में उत्साह और उमंग भर दी।
इस अवसर पर 41वीं वाहिनी के सेनानी द्वारा ग्रामीणों एवं बच्चों को साड़ी तथा कपड़े वितरित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के पश्चात स्कूली बच्चों, शिक्षकों, ग्रामीणों एवं छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारियों के साथ सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 250 बच्चों और 180 ग्रामीणों ने सहभागिता की।
कुतुल में मनाया गया यह स्वतंत्रता दिवस महज एक समारोह नहीं, बल्कि बदलते अबूझमाड़ की तस्वीर भी रहा। कभी भय और हिंसा के प्रतीक रहे कुतुल में आज बच्चों की मुस्कान, देशभक्ति के गीत और तिरंगे की शान दिखाई दी। यह दृश्य इस बात का संदेश देता है कि जहां कभी काला झंडा दहशत की पहचान था, वहां आज तिरंगा विकास, विश्वास और राष्ट्र की एकता का प्रतीक बनकर लहरा रहा है।
समारोह के अंत में उपस्थित अधिकारियों, जवानों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा राष्ट्र प्रथम की भावना को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।

🟪 प्रधान संपादक – डे नारायण सिंह बघेल

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