
🟥 रिपोर्टर -डे नारायण सिंह बघेल
🟦 जिला – नारायणपुर
*विश्व आदिवासी दिवस पर नारायणपुर में दिखी आदिवासी एकता की ताकत*
मूल अधिकारों, जल-जंगल-जमीन, बोली-भाषा और संस्कृति के संरक्षण का लिया संकल्प; पारंपरिक वेशभूषा में हजारों लोगों ने निकाली ऐतिहासिक बाइक रैली
नारायणपुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 9 अगस्त को नारायणपुर में आदिवासी समाज की एकजुटता, संस्कृति और परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिली। दिवस के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, परिचर्चाओं और रैलियों का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के युवक-युवतियां, माताएं-बहनें और समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए।
मूल अधिकारों को जानने और समझने का दिन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि अपने मूल अधिकारों को जानने, समझने और उनके प्रति जागरूक होने का ऐतिहासिक अवसर है। आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों, विशेषकर जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक को शिक्षित एवं जागरूक होना आवश्यक है।
वक्ताओं ने भारतीय संविधान में आदिवासी समाज को दिए गए विशेष अधिकारों तथा पांचवीं और छठवीं अनुसूची के प्रावधानों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकारों की जानकारी समाज को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
बोली, भाषा और संस्कृति बचाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की बोली, भाषा, लोककला, परंपरा और संस्कृति के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के दौर में अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि हमारी भाषा और संस्कृति सुरक्षित रहेगी, तभी हमारी पहचान और अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा। इसके लिए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और मातृभाषा में संवाद को बढ़ावा देना आवश्यक है।
पारंपरिक वेशभूषा में निकली ऐतिहासिक बाइक रैली
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर नारायणपुर नगर में भव्य बाइक रैली भी निकाली गई। नगर के प्रमुख मार्गों से निकली इस रैली में जिले के विभिन्न गांवों से पहुंचे हजारों आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। युवक-युवतियों के साथ माताएं-बहनें भी बड़ी संख्या में रैली का हिस्सा बनीं।
रैली के दौरान “एक तीर, एक कमान—सर्व आदिवासी एक समान” जैसे नारों से नगर गूंज उठा। रैली ने आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया।
पारंपरिक नृत्य और वाद्य यंत्रों ने मोहा मन
समारोह के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर युवाओं और महिलाओं ने मनमोहक पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य ने पूरे आयोजन को उत्साह और सांस्कृतिक रंग से भर दिया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने का संकल्प लिया।
एकजुटता के साथ आगे बढ़ने का संकल्प
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित विश्व आदिवासी दिवस का उद्देश्य दुनिया भर के आदिवासी समुदायों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। नारायणपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भी समाज के लोगों ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने, अपनी भाषा-संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने तथा पूरी एकजुटता के साथ समाज को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
🟦 प्रधान संपादक – डे नारायण सिंह बघेल













