
🟥 रिपोर्टर – डे नारायण सिंह बघेल
🟦 जिला – नारायणपुर
अबूझमाड़ के 14 दूरस्थ गांवों के लिए जीवनरेखा बने आईटीबीपी के लकड़ी के फुट ब्रिज
44वीं वाहिनी आईटीबीपी के मानवीय प्रयास से बरसात में भी ओरछा से बना रहेगा संपर्क, ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी राहत
नारायणपुर, 31 जुलाई।
अबूझमाड़ के दुर्गम और लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे 14 गांवों के ग्रामीणों को इस बारिश के मौसम में बड़ी राहत मिली है। 44वीं वाहिनी आईटीबीपी ने उफनते नदी-नालों से कट जाने वाले मार्गों पर अस्थायी लकड़ी के फुट ब्रिज (पैदल पुल) तैयार किए हैं। इन पुलों के निर्माण से वर्षों से बरसात के दौरान ओरछा से टूट जाने वाला संपर्क अब काफी हद तक बहाल हो गया है।
वर्ष 1990 से नक्सली गतिविधियों के कारण क्षेत्र में सड़क और पुल जैसी मूलभूत अधोसंरचना का विकास प्रभावित रहा। हर वर्ष मानसून के दौरान नदी-नाले उफान पर आने से ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता था। इससे मरीजों, विद्यार्थियों और दैनिक आवश्यकताओं के लिए लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
क्षेत्र में सुरक्षा शिविर स्थापित होने के बाद 44वीं वाहिनी आईटीबीपी के जवानों ने स्थानीय ग्रामीणों की समस्या को प्राथमिकता देते हुए कई स्थानों पर लकड़ी के अस्थायी फुट ब्रिज तैयार किए। इन पुलों से अब ग्रामीण पैदल और दोपहिया वाहनों के माध्यम से भी सुरक्षित आवागमन कर सकेंगे। स्थायी सड़क और पुल बनने तक ये फुट ब्रिज ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा का कार्य करेंगे।
44वीं वाहिनी आईटीबीपी के सेनानी श्री सिद्धिक पी. पी. ने बताया कि आईटीबीपी का उद्देश्य केवल सीमाओं और क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाना भी है। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान आवागमन बाधित होने की समस्या को देखते हुए जवानों ने स्वयं आगे बढ़कर इन अस्थायी पुलों का निर्माण किया, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही निर्बाध बनी रहे।
ग्रामीणों ने आईटीबीपी के इस जनहितैषी और मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि वर्षों बाद उन्हें बरसात के मौसम में सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में क्षेत्र में स्थायी सड़क और पुलों का निर्माण भी शीघ्र पूरा होगा।
🟦 प्रधान संपादक – डे नारायण सिंह बघेल













