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दुर्गम अबूझमाड़ में आईटीबीपी की 44वीं वाहिनी ने वर्षा से क्षतिग्रस्त मार्गों एवं पुलों का किया पुनर्स्थापन

🟥 रिपोर्टर – डे नारायण सिंह बघेल

🟦 जिला – नारायणपुर

दुर्गम अबूझमाड़ में आईटीबीपी की 44वीं वाहिनी ने वर्षा से क्षतिग्रस्त मार्गों एवं पुलों का किया पुनर्स्थापन

ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत, जनसेवा के प्रति आईटीबीपी की प्रतिबद्धता फिर हुई साबित

नारायणपुर, 4 अगस्त। अबूझमाड़ क्षेत्र में लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण इंद्रावती नदी से ओरछा तक जाने वाला प्रमुख मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया। मार्ग पर बने अस्थायी एवं लकड़ी के कई पुल भी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे क्षेत्र के दूरस्थ गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया और ग्रामीणों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 44वीं वाहिनी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से क्षतिग्रस्त मार्गों एवं पुलों के पुनर्स्थापन का कार्य शुरू किया। जवानों और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से कई स्थानों पर मार्गों की मरम्मत की गई तथा क्षतिग्रस्त लकड़ी के पुलों को पुनः सुरक्षित बनाकर पैदल एवं मोटरसाइकिल आवागमन के लिए चालू कर दिया गया है।
हालांकि, जटलूर नदी पर स्थित एक पुल अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने के कारण उस मार्ग से फिलहाल आवागमन संभव नहीं है। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित सिविल प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित कर नाव की व्यवस्था करने की प्रक्रिया जारी है, ताकि ग्रामीणों को जल्द वैकल्पिक आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। वहीं शेष क्षतिग्रस्त मार्गों को भी शीघ्र बहाल करने का कार्य लगातार जारी है।
आईटीबीपी की 44वीं वाहिनी सुरक्षा दायित्वों के साथ-साथ जनसेवा एवं मानवीय सहायता के प्रति भी अपनी प्रतिबद्धता निभा रही है। प्राकृतिक आपदा और आपात परिस्थितियों में स्थानीय नागरिकों की सहायता के लिए बल हमेशा तत्पर रहता है। इस पहल से क्षेत्र के ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है तथा सुरक्षा बल और स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास, सहयोग और सौहार्द भी और अधिक मजबूत हुआ है।
आईटीबीपी ने दोहराया है कि दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ जनकल्याण और मानवीय सेवा के कार्य भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे।

🟦 प्रधान संपादक – डे नारायण सिंह बघेल

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