
🟥 रिपोर्टर डे नारायण सिंह बघेल
🟪 जिला -नारायणपुर
आईटीबीपी 38वीं, 45वीं और 53वीं वाहिनी में 65वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया
भव्य परेड के साथ बड़े खाने का आयोजन, आसपास के गांवों के ग्रामीणों को किया गया ससम्मान आमंत्रित

नारायणपुर। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के 65वें स्थापना दिवस (Raising Day) के शुभ अवसर पर 38वीं, 45वीं एवं 53वीं वाहिनी के सामरिक मुख्यालयों तथा सभी कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) परिसर में भव्य परेड एवं सामूहिक भोज (बड़े खाने) का आयोजन किया गया।
38वीं वाहिनी के सामरिक मुख्यालय मुंजमेटा, 45वीं वाहिनी तथा 53वीं वाहिनी के सामरिक मुख्यालय जेलवाड़ी सहित सभी सीओबी परिसरों में आयोजित कार्यक्रम संबंधित सेनानियों के निर्देशन में संपन्न हुए। इस अवसर पर 38वीं वाहिनी सेनानी श्री अजय निर्मलकर, 45वीं वाहिनी सेनानी श्री राजीव गुप्ता तथा 53वीं वाहिनी सेनानी श्री संजय कुमार के निर्देशन में अधिकारियों एवं जवानों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और गरिमामय वातावरण में स्थापना दिवस परेड में भाग लिया।
स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य परेड ने बल की गौरवशाली परंपराओं, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को प्रदर्शित किया। इस आयोजन के माध्यम से जवानों ने बल की उत्कृष्ट कार्यशैली एवं एकजुटता का परिचय दिया।
बड़े खाने में ग्रामीणों की सहभागिता, आपसी विश्वास को मिला बढ़ावा
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सामरिक मुख्यालयों एवं सभी सीओबी परिसरों में बड़े खाने (सामूहिक भोज) का भी आयोजन किया गया। इसमें आसपास के गांवों के ग्रामीणों को ससम्मान आमंत्रित किया गया, जहां सुरक्षा बल के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों ने आपसी मेल-मिलाप एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सहभागिता की।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बल एवं स्थानीय समुदाय के बीच आपसी विश्वास, सहयोग, समन्वय और सामाजिक सद्भाव को और अधिक मजबूत करना था। ग्रामीणों की सहभागिता ने सुरक्षा बलों और जनसमुदाय के बीच पारस्परिक सहयोग एवं आत्मीय संबंधों को बढ़ावा दिया।
आईटीबीपी द्वारा इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने तथा क्षेत्र में सकारात्मक, शांतिपूर्ण एवं सहयोगात्मक वातावरण बनाए रखने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
आईटीबीपी का 65वां स्थापना दिवस न केवल बल की गौरवशाली विरासत और अनुशासन का प्रतीक बना, बल्कि सुरक्षा बल एवं ग्रामीणों के बीच मजबूत होते आपसी संबंधों और जनसहभागिता की भावना को भी रेखांकित कर गया।
🟦 प्रधान संपादक डे नारायण सिंह बघेल













