
🟥 रिपोर्टर – डे नारायण सिंह बघेल
🟪 जिला – नारायणपुर
*53वीं वाहिनी आईटीबीपी ने 8 गांवों में लगाया पशु चिकित्सा शिविर, 524 पशुओं का किया उपचार*
नशामुक्त भारत अभियान के तहत ग्रामीणों को नशे से दूर रहने किया जागरूक, पशुओं को दी गई आवश्यक दवाइयां
नारायणपुर, 31 अक्टूबर 2026। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) की 53वीं वाहिनी द्वारा सेनानी श्री संजय कुमार के मार्गदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन के स्वास्थ्य संरक्षण एवं नशामुक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से लगातार जनकल्याणकारी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी कड़ी में 22 अक्टूबर से 29 अक्टूबर 2026 तक जिले के विभिन्न गांवों में निरंतर पशु चिकित्सा शिविर एवं नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अभियान के अंतर्गत स्कूलपारा/तोयामेटा, करकापारा, धुरबेड़ा, अड़िंगपार, कोड़ेनार, पैवेर, मिचिंगपारा एवं भाटपारा गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों के पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। शिविर के दौरान पशुओं को आवश्यकतानुसार कृमिनाशक दवाइयां (पेट के कीड़ों की दवा) दी गई तथा विभिन्न बीमारियों से बचाव और उपचार के लिए जरूरी दवाइयों का निःशुल्क वितरण किया गया।
शिविर में 524 पशुओं का हुआ उपचार
53वीं वाहिनी आईटीबीपी द्वारा आयोजित पशु चिकित्सा शिविरों में कुल 524 पशुओं का उपचार एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। गांववार शिविर का विवरण इस प्रकार है—
स्कूलपारा/तोयामेटा: 22 अक्टूबर को 92 पशुओं का उपचार।
करकापारा: 23 अक्टूबर को 33 पशुओं का उपचार।
धुरबेड़ा: 24 अक्टूबर को 115 पशुओं का उपचार।
आदिंगपार: 25 अक्टूबर को 80 पशुओं का उपचार।
कोड़ेनार: 26 अक्टूबर को 76 पशुओं का उपचार।
पैवेर: 27 अक्टूबर को 90 पशुओं का उपचार।
मिचिंगपारा/भाटपारा: 29 अक्टूबर को 38 पशुओं का उपचार।
इस प्रकार आठ गांवों में आयोजित शिविरों के माध्यम से कुल 524 पशुओं को पशु चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिला। इससे ग्रामीण पशुपालकों को अपने पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल एवं आवश्यक उपचार की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हुई।
नशामुक्त भारत अभियान के तहत ग्रामीणों को किया जागरूक
पशु चिकित्सा शिविरों के साथ-साथ 53वीं वाहिनी आईटीबीपी के जवानों द्वारा नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत ग्रामीणों को नशे के दुष्परिणामों के संबंध में जागरूक किया गया। ग्रामीणों को मादक पदार्थों से दूर रहने, नशे की आदतों से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक नुकसान के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अभियान के माध्यम से आईटीबीपी ने एक ओर जहां ग्रामीणों के पशुधन के स्वास्थ्य की देखभाल में महत्वपूर्ण योगदान दिया, वहीं दूसरी ओर नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए जनजागरूकता का संदेश भी दिया।
53वीं वाहिनी आईटीबीपी की इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को राहत मिली है तथा ग्रामीणों में पशु स्वास्थ्य संरक्षण और नशामुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में सराहनीय प्रयास हुआ है।
🟦 प्रधान संपादक – डे नारायण सिंह बघेल












